Friday, 16 November 2007

स्म्र्ती विशेष

श्रधांजली
स्वर्गीय श्रीमती प्रेमवती (जन्म ०१ मार्च १९५४ से ०७ अगस्त २००७)
ईश्वर हर घर में जन्म नही ले सकता है इसी कारण वश महान जगत-पिता ने अपने रुप का स्वरूप माँ मे दिखलाया हैईश्वर ने एस सृष्टि के उदार के लिए पानी, हवा, फूल-पत्ती,पेड़-पोधे,नदी-नाले का निर्माण किया उसी तरह ईश्वर ने मनुष्य को ममता रुपी छाया से स्वारने के लिए माँ को बनाया हैमाँ ऐसा अनमोल शब्द है जिसे सुनकर हृदय स्नेहमय ममता से उज्ज्व्लित हो जाता हैमाँ जिससे हमे निर्मलता,स्वच्छता,सवेदंशीलता,सहानुभूति,कोमलता ,प्रेम से भरपूर आदि गुणों से सजी हुई हैजब बच्चा जन्म लेता है तब माँ के मुख में जो गरिमा होती है वह वह गरिमा उसे अपने बच्चे के स्वरूप को देखकर खिल उठती हैजन्म देने वाली सिर्फ माँ नही होती वह हर स्त्री माँ का स्वरूप है जिसमे स्नेह, ममता, कोमलता, प्रेम अनेको रूपों में निहित होती हैवह एक प्रेमिका, बहन, पत्नी हर एक दर्पण में सुलभ सज जाती हैएक इंसान को अपनी मंजिल कि उचाई को पाने के लिए माँ के मार्गदर्शन कि जरूरत पड़ती हैसो, माँ तेरे कितने रुप कभी दुर्गा, कभीकालीअंत में माँ के उपकारो एव बलिदानों को हम झुठला नाही सकते है
:- विशेष प्रतिनिधि
ऋचा शुक्ला
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